यूँ तो मुझे तुमसे कोई नाराज़गी नहीं,
पर अब मेरी वफाओं में वो ताजगी नहीं,
तन्हाई के इस शहर में आ के बस गया हूँ मैं,
मेरी फितरतों में अब वो आवारगी नहीं,
इबादतों ने भी अपनी कुछ आदतें बदली हैं,
अब उनमे कहीं सजदों की अदायगी नहीं
तुम को खोने की कसक भी कम सी हो गयी,
रौनक है लबों पर कोई बेचारगी नहीं,
ख्वाबों को सुला दो किसी और निगाह में तुम ,
नींदों में मेरी पहले सी अब दीवानगी नहीं,
Thursday, April 1, 2010
Wednesday, May 6, 2009
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